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September 26, 2026

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पहाड़ों की रानी मसूरी के 49 होटलों पर एनजीटी सख्त, पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन, और अवैध संचालन की होगी जांच, अगली सुनवाई 21 सितंबर को।

मसूरी/नई दिल्ली, 13 जुलाई। पहाड़ों की रानी मसूरी में पर्यावरणीय नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) को निर्देश दिया है कि मसूरी के 49 होटलों के खिलाफ की गई कार्रवाई, उनके संचालन की वैधता तथा पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट छह सप्ताह के भीतर न्यायाधिकरण में प्रस्तुत की जाए।

मामले की सुनवाई एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की। यह मामला पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों के दोहन, सीवेज प्रबंधन और आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियों के बिना होटल संचालन से जुड़ी शिकायतों के आधार पर विचाराधीन है।
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, 19 होटलों पर पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के कारण पर्यावरण क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) लगाई जा चुकी है, जबकि शेष होटलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। सुनवाई के दौरान बोर्ड ने बताया कि इनमें से कई मामलों में आगे भी कार्रवाई की जा रही है।
एनजीटी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी होटल वैध “कंसेंट टू ऑपरेट (Consent to Operate)” के बिना संचालित नहीं होना चाहिए। साथ ही बोर्ड को प्रत्येक होटल की वर्तमान स्थिति, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, क्षतिपूर्ति की वसूली तथा लंबित मामलों की अद्यतन जानकारी के साथ नई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में अनियंत्रित जल दोहन, सीवेज निस्तारण, कचरा प्रबंधन और पर्यावरणीय मानकों के पालन जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पर्यटन के बीच पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन करना आवश्यक है, ताकि मसूरी के नाजुक पारिस्थितिक संतुलन को सुरक्षित रखा जा सके।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। तब तक उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसके आधार पर एनजीटी आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।