पहाड़ों की रानी मसूरी के राज्य आंदोलनकार्यों की अपेक्षा से राज्य आंदोलनकारी हुए आहत, मुख्यमंत्री से करेंगे शिकायत।
सुनील उनियाल/ 22 August 2026 मसूरी। आज मसूरी गोलीकांड दिवस समारोह की बैठक में राज्य निर्माण आंदोलनकारियों को न बुलाए जाने पर राज्य आन्दोनकारी भड़क गए हैं , उन्होंने इसे शहीदों और आंदोलनकारियों का अपमान बताते हुए मसूरी एसडीएम राहुल आनन्द की शिकायत मुख्यमंत्री से करने की घोषणा की है। आंदोलनकारियों ने एसडीएम राहुल आनन्द की मंशा पर शक जाहिर किया है, कहा कि एस डी एम को होश में आना चाहिए।
उत्तराखंड राज्य आन्दोनकारी मंच के अध्यक्ष देवी गोदियाल ने सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि एस डी एम राहुल आनन्द को क्या पता नहीं है कि मसूरी में कौन राज्य आंदोलनकारी हैं उन्हें मसूरी गोलीकांड दिवस आयोजन की बैठक में किन लोगों को बुलाया जाना चाहिए था और वे किसे बुला रहें हैं। उन्होंने कहा कि सवैंधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का यह आचरण बिल्कुल बर्दास्त नहीं किया जाएगा। कहा कि सोमवार 24 अगस्त को सुबह 11 बजे मसूरी शहीद स्थल आंदोनकारियों की बैठक कर इस बारे में आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी संगठन के अध्यक्ष प्रदीप भण्डारी ने प्रेस को जारी बयांन में कहा मसूरी एस डी एम द्वारा उत्तराखंड शहीद दिवस 2 सितम्बर की तैयारी बैठक में मसूरी राज्य आंदोलनकारियों को बैठक में आमंत्रित न करने की संगठन कड़ी निंदा करता है। यह कैसी बैठक है जिसमें राज्य के लिए अपनी प्राणों की बाजी लगाने वाले राज्य निर्माण आंदोलनकारियों की उपेक्षा की गई। जिनकी बदौलत राज्य बना है उन्हेंएस डी एम ने बैठक में सुझाव रखने योग्य तक नहीं समझा । उन्होंने एलान किया है कि आंदोलनकारियों के प्रति एस डी एम के इस अपमानजक और उपेक्षा पूर्ण रवैये की मुख्यमंत्री से शिकायत की जाएगी।
राज्य आन्दोनकारी आर पी बडोनी ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलनकारियो को बैठक में ना बुलाना घोर अपराध है। कहीं ऐसा ना हो कि आंदोलनकारी किसी भी नेता को या मंत्री को दो सितम्बर को शहीद स्थल पर ही ना घुसने दे। एस डी एम द्वारा राज्य आंदोलनकारियों को बैठक में न बुलाना सम्पूर्ण उत्तराखंड का अपमान है।
वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी कमल भण्डारी ने कहा कि आंदोनकारियों से छुपकर हुई बैठक में राज्य आंदोनकारियों को अपमान जनक शब्द कहे जाने की सूचना है, जो बर्दास्त नहीं की जाएगी। एसडीएम राहुल आनन्द द्वारा गत वर्ष भी मसूरी के आंदोलनकारियों का अपमान किया गया।